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  • Writer's pictureAmit Gupta

अमलतास


अमलतास

अमलतास के वृक्ष बडे-बडे होते है इसकि फलिया लम्बी लटकी रहती है ।

इसका गुण भारी स्वादिष्ट शीतवीर्य व मल को लाने वाला है ।वात व्याधि का नाश करता है ।

अमलतास की फली की ऊपर की छाल को केसर , मिश्री और गुलाब जल के साथ पीसकर, सेवन कराने से प्रसव बिना कष्ट के ,शीघ्र हो जाता है ।

अमलतास की हरी पत्तियों को कुचलकर उसकी लुगदी बनाकर दाद वाले स्थान पर लगाए खुजली दूर होगी ।

अमलतास के फूल 1 भाग ,गुलकन्द 2 बाग मिलाकर खाने से कफ निकल जाता है ।

अमलतास का गुदा ,नागरमोथा ,कुटकी ,हरड ,पीपरामूल सब को बराबर मात्रा मे लेकर काढा बनाकर

सुबह -शाम लेने पर आँव की वजह से जो शूल होता है वो शांत होता है ।ज्वर मे कब्ज होने पर 50 ग्राम अमलतास का गुदा 200 मिलि.पानी मे पकाकर ठंडा होने पर छानकर एनिमा देने पर कब्ज दूर होता है ।

बच्चो के पेट मे दर्द होने पर अमलतास के फल का पेस्ट थोडा सा नाभि पर सगाने से ठीक होता है।



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