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  • Writer's pictureAmit Gupta

अरण्ड

अरण्ड

अरण्ड का पेड़ 5 से 8 फीट ऊँचा है । इसके जड पत्ते व फल का उपयोग ज्यादा होता है ।

अरण्ड का फल मधुर व उष्ण होता है, ये सूजन, कमर दर्द, कफ व खांसी को शांत करता है।

अरण्ड के पत्ते गुल्म व बस्तिशूल को नाश करते है।

अरण्डी के फल के बीजो से तैल निकाला जाता है जो अनेक प्रकार के रोगो का नाश करता है ।

अरण्ड के पत्तो को गरम करके बाधने से वायु के कारण होने वाते जोड़ो का दर्द व सूजन दूर होती है।

कमर दर्द स्नायु व मांसपेशी के दर्द मे भी शान्ति मिलती है ।

अरण्ड की लकडी की भस्म करके उसकी थोडी सी भस्म को ताजे पानी से लेने पर उदर शूल शांत होता है।

अरण्ड का तैल सभी रोगो के लिए उपयोगी है। कब्ज के रोगी मे विशेष लाभ मिलता है ।कब्ज के रोगी मे विशेष लाभ मिलता है बच्चो को दुग्ध मे 1 चम्मच व बडों या व्यस्क को 1 से 2 चम्मच दें। यदि मल की गांठे

बन गई है तो 20 मिली. एनिमा लें ।

आमवात मे शरीर का दर्द ,जोड़ो का दर्द , गठिया ,शोथ ,ग्रहणी रोग मे भी अरण्ड के तैल की मालिश से फायदा होता है ।

स्तनों की वृद्धि के लिए अथवा स्तनो मे गाँठ वनने मे भी अरणड के पत्तो को पानी में उबालकर सेंक करते से लाभ मिलता है ।

अरण्ड़ के पत्ते हल्के गर्म करके बस्ति प्रदेश पर रखने से periods अगर कम हो रहे है तो बढ जाते है ।

यदि स्त्री के स्तनो में दुग्ध के स्त्रोतो के रूक जाने से सूजन आ गई हो तो अरण्ड के पत्ते गर्म करके सेंक करने से तथा लेप करने पर दुग्ध निकलने से शोथ दूर होता है ।

अरण्ड के बीजो को पीसकर लेप करने से अधपका फोडा शीघ्र पककर फूट जाता है तथा सूजन भी खत्म होती है ।

जोड़ो के दर्द मे इसके तैल की मालिश करने से आराम मिलता है । मालिश करने से यह त्वचा को चिकना बनाता एवं कान्तिवान बनाता है ।



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