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  • Writer's pictureAmit Gupta

अर्जुन

अर्जुन

अर्जुन का वृक्ष 50-60 फीट लम्बा होता है । प्रायः ये सभी स्थानो पर पाया जाता है।

इसकी छाल का उपयोग किया जाता है। इसकी छाल गुलाबी , आभायुक्त चिकनी होती है । इसका फल छोटा व कमरख के समान

होता है । स्वाद मे कसैला होता है ।

यदि मधुमेह की वजह से परेशानी होती है तो अर्जुन की जड को पानी मे भिगोकर सुबह छान कर पी ले ।

अर्जुन की छाल 10 ग्राम ,पुराना गुड 10 ग्राम 10 लिटर दुग्घ मे मिलाकर पकाए जब दुग्ध एक चौथाई रह जाए तो छानकर

सुबह -शाम लें। हृदय सम्बन्घित विकारो को दूर करता है ।

कभी -कभी लगता है कि याददाश्त कमजोर हो रही है या याद नही आ रहता कि सामान कॅहा रखा है,इस दशा मे अर्जुन की छाल

, शंखपुष्पी ,ब्राह्मी ,वचा, जटामाँसी सब 50 ग्राम लेकर 100 लिटर दुग्ध मे पकाए ,एक चौथाई रहने पर छानकर सुबह-शाम ले

।ये स्मरण शक्ति को बढाता है।



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