top of page
  • Writer's pictureAmit Gupta

पुनर्नवा


पुनर्नवा

पुनर्नवा के लाल व स्फेद दो भाग होते है ,यह भूमि पर लेटी हुई तथा बेल के आकार की होती है ।

यह वर्षा श्रृतु मे उत्पन्न होकर बढती है और हेमन्त श्रृतु के तुषार से सूख जाती है ।

श्वेत पुनर्नवा के पत्ते व डंठल स्फेद व लाल पुनर्नवा के लाल होते है ।

स्पेद पुनर्नवा चरपरी, अत्यन्त अग्निदीपक , पांडु , शोथ ,कफ तथा उदररोग नाशक है ।

लाल पुनर्नवा कड़वी ,शीतल ,ग्राही ,वातकारक तथा रूधिर विकार को नष्ट करती है ।

पुनर्नवा का काढ़ा पीने से तथा चूर्ण रूप मे प्रयोग करने से शोथ रोग का शमन होता है ।

पुनर्नवा के जड के चूर्ण को मिश्री से लेने पर सुखी खाँसी मे आराम मिलता है ।

पुनर्नवा की जड़ का काढ़ा सुबह – शाम 20 मिली. लेने से लीवर ठीक रखता है ।

आजकल प्रोटिन ,विटामिन सी व कैल्सियम की कमी बहुत लोगो को पायी जाती है।।

पुनर्नवा का चूर्ण 3 ग्राम सुबह – शाम लेने से उस कमी की पूर्ति होती है और दर्द में

भी आराम मिलता है ।



0 views0 comments

Recent Posts

See All

Kommentarer


bottom of page