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  • Writer's pictureAmit Gupta

बबूल

बबूल

बबूल का पेड मध्यम आकार का कांटे युक्त होता है ,फूल गोल पीले एवम सुगन्ध युक्त होते है ।

आमतौर पर इसकी छाल का उपयोग होता है ।कफ को खत्म करता है, त्वचा व कृमि रोगो मे

इसकी छाल का काढा बनाकर उपयोग करते है ।

बबूल के पेड मे से ग्रीष्म श्रृतु में गोंद इक्कठा करते है ।बबूल का गोंद शीतल व पौष्टिक होता है।

बबूल का चूर्ण श्वेत प्रदर खांसी और मूत्र सम्बन्धी विकारो मे फायदेमंद है ।

बबूल का कच्चा पत्ता चबाने से प्रमेह व अतिसार मे फायदा होता है।

फोडे फूंसी मे बबूल की छाल के काढे से धोते है और पत्ता बांधते है ।जो कि फूंसी को जल्दी पका देता है .

बबूल के फल खांसी मे फायदा करते है ।

बबूल की ताजी छाल से दातून करने से मसूडे व दांत मजबूत होते है।

जड छोडकर छाल फल फूल व पत्तो का काढा बनाकर पीने से श्वेत प्रदर मे लाभ मिलता है ।

बबूल के 3 ग्राम चूर्ण को सुबह -शाम लेने से दर्द मे आराम मिलता है ।

मुह से बदबू आने पर बबूल के पत्तो का चूर्ण सरसो के तैल मे मिलाकर लगाएं।

बदबू व मुह मे पानी आना ठीक हो जाता है ।



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