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  • Writer's pictureAmit Gupta

गुड़

गुड़

गुड़ सर्व गुण सम्पन्न है। ईख रस में समग्र खनिज द्रव्य और अन्य गुण विधमान रहते हैं।

गुडं पोषण की दृष्टि से श्रेष्ठ है।

गुण—वीर्यवर्धक, भारी, वातनाशक, मूत्रशोधक, मेदा, कफ और बल को बढ़ाता है।

पुराना गुड़ हल्का पथ्य, अग्निवर्धक, पितनाशक, मधुर, वात को हरने वाला तथा रक्त शोधक होता है।

नया गुड़ कफ, श्वास, खॉसी, कृमि तथा अग्नि का वर्धन करता है।

  1. अदरक के साथ गुड़ खाने से कफ का नाश होता है।


  1. हरड़ के साथ गुड़ खाने ले पित्त का नाश होता है।


  1. सौंठ के साथ गुड़ खाने से वात का नाश होता है।


  1. भोजन के साथ गुड़खाने से गैस नही बनती है।


पुराना सुखा गुड़ पीसकर उसमे पिसी हुई सौंठ मिलाकर सूंघने से हिचकियाँ बंद हो जाती है।

शरद श्रृतु में गुड़ व तिल के लड्डु खाने से जुकाम, खाँसी आदि रोग पीडित नही करते। यदि पहले से खाँसी

हो तो पुराना गुड़ 30 ग्राम, दही 60 ग्राम और पिसी हुई काली मिर्च 6 ग्राम मिलाकर सुबह- शाम लेने से

लाभ होता है। इसे 4-5 दिन तक सेवन करना चाहिए।

रक्तातिसार, आमवात, शूल, मलावरोध एंव उदर विकार में गुड़ के साथ बेलगिरी को मिलाकर सेवन करना

अति उत्तम होता है। अग्निमांध, शीत और वात रोगो में गुड़ और जीरे का योग लाभदायक है।

कफ व हृदय रोगो में गुड़ व घी को समान मात्रा मे मिलाकर खाने से लाभ होता है।

गुड़ को आँवले के चूर्ण के साथ खाने से वीर्य की वृद्धि होती है ।



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