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  • Writer's pictureAmit Gupta

नीम

नीम

नीम एक विशाल वृक्ष है, आयुर्वेद मे चर्म रोग की श्रेष्ठ औषधियाँ नीम से निर्मित होती है।

गुण--- शीतल, ग्राही, अग्नि, वात, ज्वर, व्रण कफ तथा प्रमेहनाशक है।

नीम की पत्तियों को पानी मे उबालकर उस पानी से घाव धोएं।

नीम के पत्ते और मोम को अलसी के तैल मे जलाकर घोंटकर मरहम बनाएं और फोडे

के घाव पर लगाएं घाव ठीक हो जाता है। नीम की छाल का काढ़ा पीने से ज्वर के बाद

की कमजोरी दूर हो जाती है। नीम के तैल की मालिश करने से सब तरह की खुजली दूर होती है।

नीम के पत्तों का रस तिल के तैल मे मिलाकर नस्य लेने से मस्तिष्क के कीडे मर जाते है और

आधा सीसी का दर्द भी ठीक होता है ।

नीम की छाल, रसौंत, इन्द्रजौ तथा दारूहल्दी का काढा नित्य सुबह-शाम कुछ दिनों तक पीने

से कण्ठ के अनेक रोगों का शमन होता है।

नीम के रस मे कड़वी नीम की निम्बौलियों को पीसकर योनि में रखने से अथवा लेपन करने से

योनि की पीड़ा मिट जाती है।

नीम की पत्तियों को दही में पीसकर दाद पर लेप करने से आराम मिलता है। नीम के वृक्ष

की छाल लेकर पानी के साथ चन्दन के साथ घिसकर मुँह पर लेप लगाने से चेहरे के

दाग धब्बे व मुहासे साफ होकर चेहरा साफ होता है।




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