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  • Writer's pictureAmit Gupta

आम

आम

आम का वृक्ष विशाल व घना होता है। वैसे तो यह फल सभी प्रदेशो मे पाया जाता है लेकिन ज्यादातर

उत्तर-भारत, असम तथा दक्षिण प्रदेशो मे पैदा होता है ।

गुण--- आम के पुष्प शीतल ,रूचिकारक,वातहर ,अतिसार ,कफ- पित्त व प्रमेह नाशक है।

आम की गुठली कसैली कुछ ,खट्टी और मीठीहोती है वमन जलन व अतिसार को कम करती है ।

आम के पत्ते रूचिकारक कफ-पित्त नाशक होते है ये जब तरूण हो जाते है तो खट्टे रूखे व

रक्त मे विकार उत्पन्न करने वाले हो जाते है ।

कच्चे आम के ऊपर के छिलके उतारकर टुकडे कर सुखा दिए जाते है इसी को अमचूर कहते है ।

यह स्वाद मे खट्टा ,स्वादिष्ट, दस्तावर, कफ व वात को ठीक करता है ।

पका हुआ आम मधुर, वीर्य वर्धक, स्निग्ध, बलदायक तथा सुखदायक होता है ।

अधिक मात्रा मे आम का सेवन करने से मन्दाग्नि, विषम ज्वर व मलावरोध कै सम्भावना बन जाती है ।

परन्तु डाल पर पका आम मधुर होता है ।

आम के पत्तो की भस्म को आग से जले स्थान पर तरल पदार्थ मे मिलाकर लगाने से लाभ होता है ।

आम के नये कपोल सुखाकर चूर्ण कर ले व सुबह- शाम 3 ग्राम पानी से लेने पर मधुमेह मे आराम मिलता है।

आम की गुठली भूनकर नमक मिलाकर सेवन करने से पेट का कष्ट दूर होता है ।

यदि किसी बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो तो आम की गुठली को पानी मे घिसकर पिलाने से मिट्टी खाना कम हो जाता है ।





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